Karele ki kheti कैसे, कब करें पूरी जानकारी

Karele ki kheti कैसे, कब करें पूरी जानकारी 


Karele ki kheti
भारत के अधिकतर राज्यों में की जाती है कारन यह है की करेले का भाव मंडी में बारहों महीना अच्छा रहता है और जो किसान इस फसल से एक सीजन में लाभ ले लेता है वह फिर से दोबारा यही चाहता है अगले बार यही फसल लगाए तथा इसके अलावा और भी कई सारे कारन है जिसके बारे में आगे चर्चा करेंगे। 

Karele ki kheti कैसे, कब करें पूरी जानकारी
Karele ki kheti kaise kare 


करेले की खेती से लाभ तभी होगा जब इस फसल के उत्पादनकर्ता को फसल के बारे में बारीकी से बारीकी जानकारी हो अन्यथा वह इसका लाभ उठाने में असमर्थ होगा। तो आज हम विशेषकर यही जानेंगे की 'करेले की उन्नत खेती कैसे करे' और आपके मन  में उठ रही इन शंकाओं को दूर करेंगे-
  • करेले की खेती कैसे करें ? / करेले की अगेती खेती के बारे में पूरी जानकारी 
  • करेले की उन्नत खेती कब (किस मौसम) में करे ? / करेले लगाने का सही समय (बरसात या गर्मी) कौन -सा है ?
  • करेले की हाइब्रिड (संकर) बीज़ के प्रकार कौन-कौन से है ? / करेले की विभिन्न variety 
  • करेले को गमले में कैसे लगाए ? 
  • Karele ki kheti में होने वाले रोग तथा उनका बचाव 
  • karele ki kheti से सम्बंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

हाइब्रिड (संकर) बीज़ का चयन तथा उनकी variety 


किसी भी फसल को लगाने के लिए सही यानि की अच्छे बीज़ का चयन करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि बीज़ अच्छा होगा तभी वृक्ष भी अच्छा होगा और उसके फल सुखदायी होंगे। इसलिए बीज का चयन बड़े ही सोच समझकर करे। 

जब आप karele ki kheti करने की  सोचते हो तो सबसे पहले यह तय करना जरुरी है की आख़िरकार किस बीज़ की बुआई करना जरुरी है। कुछ लोग जो है वो घर में बीज बनाते है और उस बीज़ का उपयोग वह अगले वर्ष करते है। लेकिन इसमें तोडा risk हो जाता है की पता नहीं बीज़  सही हो या नहीं।

इसलिए मैं आपको यही सलाह दूंगा की आप अपने पास के बीज़-भंडार से बीज ख़रीदे और बीज शंकर (हाइब्रिड) प्रजाति का होना चाहिए क्योंकि जब आप अपने खेत में इस बीज की बुआई करोगे तो इसके आपको मुख्य फायदा यह होगा की इससे फल यानि की करेले का उत्पादन अधिक मात्रा में होगा जो सोने पर सुहागा के सामान होगा। 

कुछ हाइब्रिड (संकर) करेले की किस्मे-

  • पाली F1 
  • अनुष्का F1 
  • चक्र F1 
  • USM का करेला 
  • ताईसीता का करेला 

यह सब बीज क्षेत्र के आधार पर ज्यादा प्रशिद्ध होता है हो सकता है आप क्षेत्र में कोई और हाइब्रिड (संकर) बीज़ प्रसिद्द हो। 


करेला लगाने का सही मौसम(समय)


Karela ki kheti भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में अलग-अलग समय में होती है। कारण है वातावरण और दूसरी सबसे बड़ी समस्या है पानी क्योंकि करेले की खेती को सबसे अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है यदि पानी देने में जरा भी देर की जाती है तो उसे सूखने में समय नहीं लगता है। 

भारत में जाड़े खत्म होते ही फरवरी से करेले के लगाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और करेला की बुआई  फरवरी, मार्च, अप्रैल, जून, जुलाई, अगस्त, और कही-कही सितम्बर में भी की जाती है। 

NOTE:- जिस करेले की बुआई फरवरी या मार्च में होती है तो वह ठीक गर्मी में जाकर होता है इसलिए इसे गर्मी वाला करेला या करेला की अगैती खेती  भी बोली जाती है।  और जो करेला मई या जून के आस-पास बोई जाती है तो वह बरसात में जाकर फल देता  है और आम भाषा में इसे बरसाती करेला भी बोला जाता है। बरसाती करेला भारत के ज्यादातर पहाड़ी और सूखे राज्यों में होती है। 

खेत की तयारी 


जैसे हर फसल की बुवाई करने से पहले खेत की जुताई करना अत्यंत आवश्यक है ताकि मिटटी भुरभुरी हो जाये और बीज के अंकुरण में कोई परेशानी न हो और पौधे की विकाश तीव्र गति से बिना किसी रुकावट के हो सके। 

खेत की जुताई करने से पहले खेत में सड़ा हुआ गोबर (1 साल पुराना) डाल दे और उसे छिड़क दे। उसके बाद खेत की जुताई करे इससे यह लाभ होता है की खेत की जुताई के समय गोबर भी खेत में अच्छे तरीके से मिल जाता है और मिटटी भी भुरभुरी हो जाती है। इस बात का अवश्य ध्यान दे की जब आप बीजारोपण करे तो खेत में अच्छी-खासी नमी होनी चाहिए। 

करेले की बीज को लगाने का सही तरीका 


करेले की बीज़ अन्य बीजो के मुकाबले बहुत ही अलग होती है इसलिए इस बीज की बुवाई करने से पहले थोड़ा ध्यान दिया जाता है। करेले के बीज़ के ऊपर थोड़ी मोटि परत चढ़ी होती है जिसे हटने में समय लगता है। 

करेले की बीजो को खेतो में लगाने से पहले लगभग 36 घंटे (डेढ़ दिन तक)पानी में भिगो कर रखे ताकि इसके बीजो को अंकुरण होने में परेशानी ना हो। करेले के बीज को लगाने की मुख्यतः दो विधि है-
  1. बीजो को डायरेक्ट खेत में लगभग दो सेंटीमीटर निचे यानि की सबसे छोटी वाली ऊँगली के आधे या उससे भी कम गहराई में बीज को बो दे। तब आपकी यह बीज एक सप्ताह के अंदर ही अंकुरित हो जाएगी। और पौधे का रूप धारण कर लेगी। 
  2. फुले हुए बीजो को निचे दी गई छोटी वाली पन्नी में बो दे।  पन्नी में बीजो को लगाने से पहले पन्नी में अच्छी गोबर वाली मिटटी को डाल दे और उसके बाद उसमे बीज लगाकर पन्नी के निचे किसी नुकीले चीज से तीन-चार जगहों पर छेद कर दे ताकि पानी के रुकने से बीज सड़े नहीं। इस पन्नी में भी करेला का पौधा एक सप्ताह के अंदर तैयार हो जायेगा। जब पौधा तैयार हो जाये तो फिर उसे कियारी में ट्रांसप्लांट कर दे। 

इन बातो पर विशेष ध्यान दे -


  • जब आप खेत में किसी भी  बीज की बुआई करते है तो खेत में नमी होना अति आवश्यक है। अन्यथा सूखे मृदा में बीज अंकुरित होकर सुख जायेगा। 
  • इन बीजो को कियारी बनाकर लगाए जिससे आपको सिचाई करने में, खरपतवार (घास इत्यादि) और सबसे महत्वपूर्ण बात फल तोड़ने में आसानी हो। कियारी आप बीजो को लगाने से पहले भी बना सकते है और बीजो को लगाने के बाद भी। दो कियारी के बिच की दुरी 5-7 फीट रख सकते है। 
  • एक जगह में 2-3 बीजो को लगाए और दो थालो के बिच की दुरी 2 से 3 फीट या अपने अनुसार रख सकते है बस इस बात का ध्यान दे की करेले के पौधे को विकसित होने में कोई परेशानी ना हो।
  • यदि आप चाहते है की करेले का उत्पादन अच्छा और ज्यादा मात्रा में हो तो आपको इसके लिए मचान(कही-कही इसे छत भी बोला जाता है विशेषकर यह प्लास्टिक वाले रस्सी और बास से बनाया जाता है।) बनने की आवश्यकता होगी। इस मचान के जरिये करेला का पौधा अपना लत बड़ा बनाता है और जितना लम्बा लत होगा होगा करेले का पैदावार भी उतना ही अधिक होगा। मचान बनाने पर थोड़ा खर्च ज्यादा पड़ जाता है इसलिए आप मचान के स्थान पर पेड़ों के सूखे टहनियों को पौधे के नजदीक गाड़ सकते है। और इससे भी करेले की पैदावार उतनी ही होगी जितनी की मचान या छत बनाने से। 
NOTE:- अब मार्केट में ऐसे कई सारे निर्मित नेट आ गए है जिसका उपयोग करना बहुत ही आसान हो गया है।  उसमे केवल आपको बास गाड़ने होंगे और उसके साथ ही साथ उसमे वो निर्मित नेट को बांध देना होगा जो मचान या छत का काम करेंगे। 
  • करेला को पानी की अत्यंत आवश्यकता होती है इसलिए इसमें पानी एकदम सही समय पर दे आमतौर पर करेले के फसल में हर 3 दिनों  में पानी दी जाती है। 

करेले को गमले में लगाने से पहले रखे इन बातो का ध्यान-


करेला एक ऐसा पौधा है जिसे कही भी यानि की बड़े जगह या छोटे जगह में भी लगाया जा सकता है बस करेला को अनुकूलित वातारण मिलना चाहिए। जो लोग गांव में रहते है या जिनके पास बड़ी भूमि है वो तो करेले की खेती आसानी से कर सकते है पर जो सघन शहरी इलाको में रहते है वो भी बड़ी आसानी से करेले को अपने घर में ऊगा सकते है। 

यदि आप भी चाहते है की करेले को घर में ही उगाये तो इन स्टेप्स को फॉलो करे-
  1. एक छोटा या बड़ा गमला ले गमले के अलावा आप कोई बाल्टी या कोई बड़ी चीज भी ले सकते है जिसमे मिटटी को स्टोर कर आसानी से रखा जा सके। इस बात का ख़ास ध्यान दे की गमले में छेद हो क्योंकि यह बीज को सड़ने और फंगस लगने से बचता है। 
  2. मिटटी में सड़ी हुई गोबर को अच्छे तरीके से मिलाये और उन दोनों के मिश्रण को गमले डाल दे। मिश्रण को डालने से पहले गमले में छेद के जगह पर कुछ ऐसी चीज़ रखे ताकि मिटटी बाहर न जाये पर पानी आसानी से बहार चली जाये। 
  3. फुले हुए करेले के बीज को मिटटी में दबा दे और हलकी पानी की छिड़काव कर दे।
  4. लगभग एक सप्ताह में करेले के पौधे का विकाश आपको दिखने लगेगा। 

करेले में लगने वाले रोग और उससे बचाव 

करेला एक ऐसा पौधा है जिसे आप सुकवार बोले  तो कोई दोस नहीं। इसलिए करेले को बहुत ही ध्यान से सेना पड़ता है। जब आप करेले को लगते है तो उसमे मुख्यतः दो प्रकार के दोष उत्पन्न होते है जिसके बारे में हम शीघ्र ही चर्चा करेंगे-
  1. जब करेला का बीजारोपण होता है तो करेले के  पौधे के वृद्धि के समय समस्या आती है या जब पौधे का विकाश हो जाता है तो फल बनने में समस्या आती है इसलिए ऐसी परिस्थिति से निज़ात पाने के लिए पौधे पर इसाबियन, धनजाइम गोल्ड, धानुविट जैसे विटामिन्स का छिड़काव होता है। 
  2. पौधे का विकास होने के बाद या विकास के समय पौधे पर कीड़े लग सकते है जो पौधे की आगे की वृद्धि के लिए बहुत ही हानिकारक है। इसलिए इन कीड़ो को ख़तम करने के लिए सुपरकिलर 25 %, जहर, लीथल 505, रोगोहित, रोगहर जैसे कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। 
NOTE:- उपरोक्त जितने भी विटामिन्स और कीटनाशको के नाम बताये गए है। इनके अलावा भी और कई सारे insectisides और vitamins मार्केट में उपलब्ध है जिनके उपयोग से आप करेले में किसी भी रोग से बचाव कर सकते है। 

क्या आप जानना चाहते है की-

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न  (FAQ)


1. क्या करेले की खेती से वास्तव में लाभ होती है ? 


 उत्तर: सब्जियों में एक करेला ही एक ऐसी सब्जी है जिसकी कीमत हर समय आसमान छूती है। यदि पुरे भारत में देखे तो करेले का भाव लगभग 40 रु प्रति किलोग्राम होता है आप इससे ही अनुमान लगा सकते है की यदि प्रतिदिन आप 1 कीविंटल करेले का उत्पादन कर रहे है तो आपको कितना मुनाफा होगा।

2. करेले का बीज मार्केट में इतना महंगा क्यों है ?


उत्तर: जो भी कंपनी करेले के बीज का उत्पादन करती तो उसे करेले के बीज का बहुत ही बारीकी से सेवन करना पड़ता है और तब जाकर इसका बीज उत्पन्न होता है। यह स्थिति केवल करेले के साथ नहीं है बल्कि हर संकर बीज की कमर ज्यादा है। 



तो यह थी 'करेले की खेती कैसे करे' की सम्पूर्ण जानकारी आशा करता हूँ की आपको यह जानकारी पसंद आई होगी और आपके मन के सभी प्रश्न समाप्त हो गए होंगे परन्तु यदि अभी भी आपके मन में कोई प्रश्न है तो बेझिझक अपने प्रश्न को कमेंट बॉक्स में पूछे मुझे आपके प्रश्नो का जबाब देकर बहुत ही ख़ुशी अनुभव होगी। इस प्रकार की महत्वपूर्ण और पूरी जानकारी को प्राप्त करने के लिए Vishwa Sewa को अवश्य SUBSCRIBE कर ले। 
धन्यवाद !

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